Highlights
- फिलीपींस में प्रमुख विपक्षी नेता रहे बेनिग्नो एक्विनो जूनियर वतन लौटते ही मार दिए गए थे।
- पाकिस्तान की पूर्व PM बेनजीर भुट्टो पहले फिदायीन हमले में बचीं लेकिन बाद में मार दी गईं।
- क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो ने 3 साल तक सैन्य संघर्ष किया और क्यूबा की सत्ता पर काबिज हुए।
भारत में करीब 2 साल तक निर्वासन में रहने के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश आवामी लीग की अध्यक्षा शेख हसीना ने अपने वतन लौटने का ऐलान कर दिया है। 5 अगस्त को बांग्लादेश से निष्कासन की दूसरी बरसी पर शेख हसीना ने दुनिया को वर्चुअली संबोधित किया और बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया। अपने भाषण में शेख हसीना ने ये भी कहा कि उन्हें पता है कि वापस लौटने पर उन्हें मारा जा सकता है, जेल में डाला जा सकता है, उनके ऊपर झूठे मुकदमे चलाए जा सकते हैं, इसके बावजूद वह वतन वापसी करेंगी। हालांकि, शेख हसीना ऐसा पहले भी कर चुकी हैं। इस आर्टिकल में समझिए कि शेख हसीना के अलावा ऐसे कौन से बड़े निर्वासित नेता रहे हैं जो जान का खतरा होने के बावजूद अपने देश लौटे। इनमें से कोई मारा गया या जेल में रहा तो किसी ने सत्ता भी हासिल कर ली।
शेख हसीना खुद निर्वासन से सत्ता तक पहले कैसे पहुंची थीं?
बांग्लादेश के संस्थापक नेता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और उनकी फैमिली के ज्यादातर सदस्यों को 15 अगस्त 1975 को सैन्य तख्तापलट में मार दिया गया। उस वक्त उनकी बेटी शेख हसीना वेस्ट जर्मनी में थीं, जिसकी वजह से उनकी जान बच गई थी। इसके बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। तब शेख हसीना को लगभग 6 साल तक निर्वासन में जिंदगी बितानी पड़ी थी। इसी दौरान, 1981 में जब हसीना भारत में ही थीं, तब अवामी लीग ने उन्हें पार्टी का अध्यक्षा चुन लिया था। इसके बाद, 17 मई 1981 को शेख हसीना ने बांग्लादेश में सैन्य शासन के विरोध और संभावित खतरों के बावजूद वतन वापसी का फैसला लिया था।
वतन लौटने के 15 साल बाद हासिल की सत्ता
फिर बांग्लादेश लौटने के बाद शेख हसीना ने मिलिट्री रूल, खासकर हुसैन मोहम्मद इरशाद के शासन के विरुद्ध वर्षों तक लोकतंत्र कायम करने के लिए बड़े जनआंदोलन किए। लंबे सियासी संघर्ष और विपक्ष में रहने के बाद शेख हसीना की पार्टी आखिरकार 1996 के आम चुनाव में जीती और शेख हसीना पहली बार प्रधानमंत्री बनीं। 2009 में शेख हसीना दोबारा सरकार में लौटीं और लगातार 15 साल तक बांग्लादेश पर शासन किया। हालांकि, अगस्त 2024 में छात्रों के विद्रोह के बाद उन्हें सत्ता छोड़कर एक बार फिर निर्वासन में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
निर्वासन के बाद अपने वतन लौटने वाले प्रमुख नेता
| डिटेल | बेनिग्नो एक्विनो जूनियर (लौटते ही मारे गए) | बेनजीर भुट्टो (आतंकी हमले में गई जान) | फिदेल कास्त्रो (हासिल की सत्ता) | वॉरेन किज्जा बेसिग्ये (सत्ता तक दोबारा नहीं पहुंच पाए) |
|---|---|---|---|---|
| देश | फिलीपींस | पाकिस्तान | क्यूबा | युगांडा |
| सियासी भूमिका | सीनेटर और प्रमुख विपक्षी नेता | पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की अध्यक्षा | क्रांतिकारी नेता | पूर्व सैन्य अधिकारी और विपक्षी नेता |
| निर्वासन का समय | 3 साल (1980–1983) | 8 साल (1999–2007) | लगभग 1.5 साल (1955–1956) | 4 साल (2001–2005) |
| निर्वासन की वजह | मौत की सजा के बाद इलाज के खातिर अमेरिका गए, फिर सुरक्षा कारणों से वहीं रुके रहे | करप्शन के मामलों में एक्शन, जिसे उन्होंने सियासी साजिश बताया | जेल से रिहा हुए, लेकिन सरकारी दमन के डर से क्यूबा छोड़ना पड़ा | 2001 के इलेक्शन के बाद धमकियों, राजनीतिक उत्पीड़न और हिंसा के कारण देश छोड़ना पड़ा |
| निर्वासन में कहां रहे | अमेरिका | UAE और यूनाइटेड किंगडम | मेक्सिको और अमेरिका | साउथ अफ्रीका और अमेरिका |
| देश लौटने की वजह | लोकतंत्र की बहाली और फर्डिनेंड मार्कोस को चैलेंज करने के लिए | 2008 के इलेक्शन में अपने सियासी दल की कमान संभालने और परवेज मुशर्रफ को चैलेंज देने के लिए | फुल्हेंसियो बतिस्ता की सरकार के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति शुरू करने के लिए | राष्ट्रपति चुनाव 2006 लड़ने और योवेरी मुसेवेनी को चैलेंज करने के लिए |
| वापसी के समय सियासी हालात | फिलीपींस में मार्कोस की तानाशाही और फौज का नियंत्रण | मुशर्रफ राष्ट्रपति और आर्मी चीफ थे, पाकिस्तान में सियासी अस्थिरता और आतंक चरम पर था | बतिस्ता की मिलिट्री डिक्टेटरशिप स्थापित थी | मुसेवेनी ने संविधान में बदलाव करके सत्ता में अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी और सेना पर उसका कंट्रोल था |
| प्रमुख खतरे क्या थे | दोबारा जेल, मौत की सजा या हत्या | अरेस्ट, सियासी विरोधियों या आतंकी संगठनों के हत्या करने का डर | जंग में मौत, फांसी या आजीवन कारावास | राजद्रोह का केस, सैन्य अदालत, जेल या हत्या |
| क्या सरकार सपोर्ट में थी? | नहीं | नहीं | नहीं | नहीं |
| वापसी के बाद क्या हुआ? | मनीला एयरपोर्ट पर उतरते ही गोली मारकर हत्या कर दी गई | कराची में वेलकम रैली में फिदायीन हमला हुआ, जिसमें बेनजीर भुट्टो बच गईं | ग्रान्मा नौका से उतरने के बाद विद्रोहियों पर हमला किया और अधिकांश को मार डाला | लौटने के कुछ ही वक्त बाद अरेस्ट कर राजद्रोह और अन्य आरोप लगाए गए |
| अंतिम नतीजा | मर्डर | दिसंबर 2007 में रावलपिंडी में मौत के घाट उतार दिया गया | 1959 में फुल्हेंसियो बतिस्ता को हटाकर सत्ता पर काबिज हो गए | कई बार जेल गए, लेकिन विपक्ष की सियासत जारी रखी |
| ऐतिहासिक प्रभाव | बेनिग्नो एक्विनो जूनियर की हत्या 1986 की पीपुल पावर क्रांति की प्रेरणा बनी | बेनजरी के मर्डर के बाद बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, PPP सरकार में आई और परवेज मुशर्रफ को इस्तीफा देना पड़ा | क्यूबा में कम्युनिस्ट शासन स्थापित हो गया और जिससे शीत युद्ध की सियासत प्रभावित हुई | युगांडा का विपक्ष मजबूत हुआ और न्यायिक दमन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आया |
(सोर्स- Amnesty International Case Files; European Court of Human Rights rulings, UN Commission of Inquiry into the Assassination of Benazir Bhutto, Human Rights Watch Reports, Uganda, 2006)
वे नेता जो वतन वापस लौटे और मारे गए
बेनिग्नो एक्विनो जूनियर: फिलीपींस में 1983 में एयरपोर्ट के रनवे पर गोली मारी गई।
बेनजीर भुट्टो: 2007 में बंदूक और बम से किए गए हमले में उनकी हत्या कर दी गई।

वे नेता जो वतन वापस आए और हासिल की सत्ता
व्लादिमीर लेनिन: तत्कालीन USSR और वर्तमान रूस के नेता व्लादिमीर लेनिन अप्रैल, 1917 में स्विट्जरलैंड से लौट आए। हालांकि, जुलाई में USSR की अंतरिम सरकार ने व्लादिमीर लेनिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया, जिसकी वजह से उन्हें कुछ वक्त के लिए छिपना पड़ा, फिर भी उन्होंने कामयाबी से अक्टूबर क्रांति का नेतृत्व किया।
अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी भी कभी निर्वासन में रहे। वे फरवरी, 1979 में अपने वतन ईरान लौटे। हालांकि, तब तक शाह ईरान छोड़कर जा चुके थे, लेकिन फौज और प्रधानमंत्री शापूर बख्तियार का अभी भी कंट्रोल था और उन्होंने अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के प्लेन को मार गिराने और उन्हें अरेस्ट करने की धमकी दी थी। इसके बावजूद, जब अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ईरान आए तो ईरानी सरकार नहीं टिक सकी।

फिदेल कास्त्रो: क्यूबा की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए फिदेल कास्त्रो 1956 में लौटे। इसके बाद, फिदेल कास्त्रो ने करीब 3 साल तक गुरिल्ला युद्ध किया और फिर सत्ता तक का रास्ता तय किया।

वे नेता जो शांति से लौट आए, लेकिन दोबारा सत्ता नहीं पा सके
मैनुअल जेलाया: होंडुरास में 28 जून, 2009 को तख्तापलट करके मैनुअल जेलाया को सत्ता से हटा दिया गया था। फिर, मैनुअल जेलाया को कोस्टा रिका और डोमिनिकन रिपब्लिक जाना पड़ा। इसके बाद, 21 सितंबर 2009 को मैनुअल जेलाया चुपके से होंडुरास लौटे और उन्होंने ब्राजील के दूतावास में शरण ले ली। बाद में 2011 में, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कार्टाजेना समझौते के जरिए मैनुअल जेलाया वापस होंडुरस लौटे। इसके बाद, मैनुअल जेलाया पॉलिटिक्स में एक्टिव तो रहे, लेकिन कभी दोबारा राष्ट्रपति नहीं बन पाए।
वो नेता जो वापस लौटे और उन्हें जेल में डाल दिया गया
जीन-बेडेल बोकासा: गद्दी से हटाए गए तानाशाह जीन-बेडेल बोकासा 1986 में अपनी मर्जी से सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक वापस लौटे, क्योंकि उनको गलतफहमी थी कि पब्लिक उनका स्वागत करेगी। लेकिन लौटते ही जीन-बेडेल बोकासा को तुरंत अरेस्ट कर लिया गया, उन पर केस चला और बाद में मौत की सजा सुना दी गई। हालांकि, इस सजा को बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया था।
किज्जा बेसिग्ये: युगांडा लौटने के बाद किज्जा बेसिग्ये बार-बार अरेस्ट हुए और रिहा किए गए। लेकिन वह कभी सत्ता नहीं पा सके।
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